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- कुछ शाबर मन्त्र- कार्य सिद्धि हेतु - किसी भी शुक

- कुछ शाबर मन्त्र-
कार्य सिद्धि हेतु - किसी भी शुक्ल पक्ष के दिन सायं 6 बजे एक देशी पान, दो साबुत
लौंग, सात बताशे लेकर नदी के किनारे जाकर मंत्र 108 बार पढ़ें। उसके पश्चात् प्रसाद को
जल में प्रवाहित कर दें। सात दिन तक ऐसा करें, तो रूके कार्य बन जाएंगे।
-
मन्त्र - पहिले नाम भगवान् का। दूजे नाम औतार का । तिजे नाम सत् गुरु, जिनका
नाम गोरखनाथ। उनकी कृपा और उनकी दया । इस ख्वाजा-खिदर पूजने के लिए
परसाद लेकर आया। लोना चमारी दिरन्त की दुहाई। वैष्णों शाकुंबरी और औतार पीर
और पैगम्बर इन सबकी दया के साथ दरिया के किनारे, जिससे हमारी आत्मा ठंडी ।
लोना चमारी, दुहाई। वस्तम पेरूल युसूफ की तरह, भूरे देव की तरह, सत्यनारायण की
तरह मैंने भी पैर बढ़ाया। लोना चमारी की दुहाई । हरी - हरी, शिव - शिव, जयन्ती
भद्रकाली।
-
शत्रुता शमन-मन्त्र - निम्न मन्त्र को मंगलवार के दिन से आरम्भ करना चाहिए और
31 दिन तक प्रतिदिन 1108 बार जप करें। प्रतिदिन मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाकर
बच्चों को बांटे। इस प्रकार करने से शत्रु स्वयं ही झुकेगा।
"
'ॐ नमो आदेश, कामरू देश कामख्या देवी । जले तेल - तेल, महातेल तारे। अमुक
लहर पीर पल में टारे । मन्त्र पढ़े नरसिंह देव कुटिया में बैठ के श्री रामचन्द्र जी रहि-
रहि फूंक के। जाय अमूक जलन एक पलज में, जाय-खाय सागर की नीर नोन में | आज्ञा
हाडि दास । फुरो मन्त्र, चण्डी वाचा ।
वशीकरण हेतु - (1) किसी भी स्त्री या पुरुष को मोहित, आकर्षित अथवा अपने वश
में करने के लिए रोज़ाना सायंकाल 108 बार निम्न मन्त्र का जाप प्राण-प्रतिष्ठित स्फटिक
की माला से करें। मंत्र इस प्रकार है-
।
'ॐ नमो मोहिनी महामोहनी अमृत वासनी ऐं नमो सिद्धि। गुरु के पाय जानुं । अर्जुन
के वान। धनेश्वरी की माटी बन्धो । घाउन बन्धो । पाटि मेरि, भक्ति गुरु की फुरो मंत्र ईश्वरों
वाचा ।
*श्वेत चन्दन, लाल चन्दन, अगर, तगर, केशर, कस्तूरी, कर्पूर और गोरोचन |
* * श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र नहीं होने चाहिए।

©KhaultiSyahi #Shabar #shabarmantar #mantra #success #hindu #sanskrit #life#truth #experience #khaultisyahi
- कुछ शाबर मन्त्र-
कार्य सिद्धि हेतु - किसी भी शुक्ल पक्ष के दिन सायं 6 बजे एक देशी पान, दो साबुत
लौंग, सात बताशे लेकर नदी के किनारे जाकर मंत्र 108 बार पढ़ें। उसके पश्चात् प्रसाद को
जल में प्रवाहित कर दें। सात दिन तक ऐसा करें, तो रूके कार्य बन जाएंगे।
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मन्त्र - पहिले नाम भगवान् का। दूजे नाम औतार का । तिजे नाम सत् गुरु, जिनका
नाम गोरखनाथ। उनकी कृपा और उनकी दया । इस ख्वाजा-खिदर पूजने के लिए
परसाद लेकर आया। लोना चमारी दिरन्त की दुहाई। वैष्णों शाकुंबरी और औतार पीर
और पैगम्बर इन सबकी दया के साथ दरिया के किनारे, जिससे हमारी आत्मा ठंडी ।
लोना चमारी, दुहाई। वस्तम पेरूल युसूफ की तरह, भूरे देव की तरह, सत्यनारायण की
तरह मैंने भी पैर बढ़ाया। लोना चमारी की दुहाई । हरी - हरी, शिव - शिव, जयन्ती
भद्रकाली।
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शत्रुता शमन-मन्त्र - निम्न मन्त्र को मंगलवार के दिन से आरम्भ करना चाहिए और
31 दिन तक प्रतिदिन 1108 बार जप करें। प्रतिदिन मोतीचूर के लड्डुओं का भोग लगाकर
बच्चों को बांटे। इस प्रकार करने से शत्रु स्वयं ही झुकेगा।
"
'ॐ नमो आदेश, कामरू देश कामख्या देवी । जले तेल - तेल, महातेल तारे। अमुक
लहर पीर पल में टारे । मन्त्र पढ़े नरसिंह देव कुटिया में बैठ के श्री रामचन्द्र जी रहि-
रहि फूंक के। जाय अमूक जलन एक पलज में, जाय-खाय सागर की नीर नोन में | आज्ञा
हाडि दास । फुरो मन्त्र, चण्डी वाचा ।
वशीकरण हेतु - (1) किसी भी स्त्री या पुरुष को मोहित, आकर्षित अथवा अपने वश
में करने के लिए रोज़ाना सायंकाल 108 बार निम्न मन्त्र का जाप प्राण-प्रतिष्ठित स्फटिक
की माला से करें। मंत्र इस प्रकार है-
।
'ॐ नमो मोहिनी महामोहनी अमृत वासनी ऐं नमो सिद्धि। गुरु के पाय जानुं । अर्जुन
के वान। धनेश्वरी की माटी बन्धो । घाउन बन्धो । पाटि मेरि, भक्ति गुरु की फुरो मंत्र ईश्वरों
वाचा ।
*श्वेत चन्दन, लाल चन्दन, अगर, तगर, केशर, कस्तूरी, कर्पूर और गोरोचन |
* * श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र नहीं होने चाहिए।

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