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Amit Seth

हिंदू धर्म में कितने देवी देवता हैं nojoto #viral #Trending

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neelu

#sunset_time यह तो #नहीं पता... #दशहरे पर #कितने #रावण जले थे पर #देखते हैं.... #दिवाली पर #कितने #राम #बनते हैं

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White यह तो नहीं पता...
 दशहरे पर कितने रावण जले थे 
पर देखते हैं....
 दिवाली पर कितने राम बनते हैं

©neelu #sunset_time यह तो #नहीं पता...
 #दशहरे पर #कितने #रावण जले थे 
पर #देखते हैं....
 #दिवाली पर #कितने #राम #बनते हैं

gaTTubaba

#karwachouth तुम्हें देखते देखते जिंदगी कम पड़ गयी तो ये दिन क्या चीज़ हैं , ये रात क्या चीज हैं ? कितने जनम जी लिए एक ही जनम में भूल गए

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White तुम्हें देखते देखते जिंदगी कम पड़ गयी 
तो ये दिन क्या चीज़ हैं , ये रात क्या चीज हैं ?

कितने जनम जी लिए एक ही जनम में 
भूल गए उम्र क्या चीज हैं ? याद हैं साथ क्या चीज हैं |

©gaTTubaba #karwachouth तुम्हें देखते देखते जिंदगी कम पड़ गयी 
तो ये दिन क्या चीज़ हैं , ये रात क्या चीज हैं ?

कितने जनम जी लिए एक ही जनम में 
भूल गए

Veer Tiwari

रामधारी सिंह दिनकर "कुरुक्षेत्र"

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नोट: रामधारी सिंह दिनकर की कविता "कुरुक्षेत्र"

आज मैंने रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध कविता "कुरुक्षेत्र" पढ़ी, और इसने मेरे मन में अनगिनत विचारों का जन्म दिया। यह कविता न केवल युद्ध की विभीषिका को उजागर करती है, बल्कि मानवता, नैतिकता, और धर्म के गहरे सवालों को भी सामने लाती है।

जब मैं इस कविता को पढ़ रहा था, तो मुझे लगा कि यह केवल एक ऐतिहासिक कथा नहीं है, बल्कि आज के समय में भी इसका महत्व है। आज जब हम अपने समाज में विभिन्न प्रकार के संघर्ष और असमानताओं का सामना कर रहे हैं, दिनकर जी की यह कृति हमें एक नई दृष्टि प्रदान करती है। कविता में कौरवों और पांडवों के बीच का संघर्ष, केवल भौतिक युद्ध नहीं, बल्कि एक मानसिक और आध्यात्मिक लड़ाई भी है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमें ऐसी लड़ाइयों की आवश्यकता है? क्या हम अपने धर्म और नैतिकता के सिद्धांतों के खिलाफ जाकर किसी भी प्रकार की हिंसा को सही ठहरा सकते हैं?
कविता में दिनकर जी ने जिस तरह से लाशों की महक और घायल सैनिकों की पुकार का चित्रण किया है, वह अत्यंत संवेदनशील है। यह हमें याद दिलाता है कि युद्ध केवल एक शारीरिक संघर्ष नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी होती हैं अनगिनत मानसिक और सामाजिक पीड़ाएँ। आज के समय में, जब हमारे समाज में हिंसा, धार्मिक असहमति, और राजनीतिक संघर्षों की बातें बढ़ रही हैं, तब यह कविता और भी अधिक प्रासंगिक हो जाती है।
कविता ने मुझे यह सिखाया कि हमें संवाद और समझदारी के माध्यम से समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। आज के संदर्भ में, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि शांति केवल युद्ध के बिना नहीं है, बल्कि यह आपसी सहयोग और समझदारी से ही संभव है। हमें दिनकर जी के इस महत्वपूर्ण संदेश को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
इसलिए, मैंने निश्चय किया है कि मैं अपने आसपास के लोगों के साथ संवाद स्थापित करूंगा। मैं समझता हूँ कि बातें करने से misunderstandings कम होती हैं और सामंजस्य बढ़ता है। हमें हर किसी के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और असमानताओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
इस कविता को पढ़ने के बाद, मैंने यह महसूस किया कि रामधारी सिंह दिनकर केवल एक कवि नहीं, बल्कि एक विचारक भी थे। "कुरुक्षेत्र" में दिए गए विचार और संदेश आज भी हमारे समाज के लिए प्रासंगिक हैं। मुझे लगता है कि हम न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सुधार कर सकते हैं, बल्कि समाज को भी एक सकारात्मक दिशा में ले जा सकते हैं।
आज का यह अनुभव मुझे हमेशा याद रहेगा, और मैं इसे अपनी जीवन यात्रा में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखता हूँ।

©Veer Tiwari रामधारी सिंह दिनकर "कुरुक्षेत्र"

Amit Seth

हमारी आंखें कितने मेगापिक्सल की होती हैं nojoto #viral #Trending

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Cricket

Virat Kohli के ODI में कितने century हैं? #ViratKohli #Odi #kingkohli #India

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Mumtaj Ansari

न जाने कितने मिट गए हैं हमें मिटाने वाले

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Mumtaj Ansari

न जाने कितने मिट गए हैं हमें मिटाने वाले

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Ravendra

दहशत में हैं ग्रामीण

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Pr.Vinod sk(Trivandrum,kerala)

#indian_akshay_urja_day आज की बाइबल क्लास में कितने लोग शामिल होने के लिए तैयार हैं.. 9:30 से 10 बजे तक

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