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SAMSHER P
रात भर इक चांद का साया रहा इश्क़ का इक ज़ख्म नुमाया रहा। नींद में भी करवटें हम बदलते रहे शायद सपनों में तू था आया रहा। बात बात पे तेज़ होती है धड़कनें बहुत दिल को मैंने समझाया रहा। इतने संगदिल होना भी अच्छा नहीं याद तेरी में सब कुछ भुलाया रहा। चाहत होती तो निभा भी सकते थे मजबूरी का राग बेकार गाया रहा। ©SAMSHER P #sayari #kavita
POONAM SHARMA
White 💜KAVYA KA JOSH💜 "Tere ishq ki zaroorat hai, Mere dil ko, mere jazbaat ko, Tujhse hi hai, tujhpe hi hai, Mere dil ka yeh aarzoo hai. 💜💜 💜 ©POONAM SHARMA #KAVITA
Vibha
White Kanto se sikha hmne rksha krna Tootte tare se sikha hmne logo ki iksha puri krna Ek asafal Guru hi btaya hme kaise safal hai hona ..........#see positivity in everything ©Vibha #kavita
shiv putra
White शब्द वाक् अलंकारिक है केवल । अहम् भावों का होना चाहिए यूँ कहीं भी न खोला करें मन की किताबे कोरे कागज को पढ़ने का हुनर भी तो होना चाहिए ।। विचार पीयूष achrya Pt. saurabh dhar ©shiv putra #kavita
kavi Dinesh kumar Bharti
मेरी कविता में खो जाओ मेरी कविता के हो जाओ ©kavi Dinesh kumar kavita
kavita
read moreYash
White Aasman hai neelā, Gulāb hai laal. Aur bhai, Kya haalchaal. ©Yash #kavita
Prakash Vidyarthi
White " विषय अनुरूप ज्ञान" लिखते हैं आज कुछ विषय वस्तु अनुरूप ज्ञान। कहीं छाया तो कहीं धूप फिर कैसा और क्यों अभिमान प्राइमरी वाली नखरा करे हाई क्लास वाली करे प्यार। मिडिल वाली मन को भाए जाति धर्म बना दीवार।। मैथ वाली मोहब्ब्त करी अंग्रेज़ी वाली आंखे चार। हिन्दी वाली होश उड़ा गईं संस्कृत वाली प्रेम आधार ।। हिस्ट्री वाली हिसाब करे इकोनॉमिक्स वाली दर्द बढ़ाएं। साइंस वाली चाहत शौक रही ज्योग्राफी वाली दिल में समाए।। ऊर्दू वाली परी बड़ी सुन्दर लगे भोजपुरी वाली स्नेह रास रचाती। केमिस्ट्री वाली घुलना मिलना चाहें फिजिक्स वाली दुर भाग जाती।। बायोलॉजी वाली करीब जो आती दिल में कम्पन बढ़ाती। यूपी बंगालन झारखंडी हीरोइन सब हैं भाव बडी खाती।। मनोविज्ञान वाली मन को समझे योगा वाली योगसन सिखाए। राजनीति शास्त्र वाली खेल खेलें नागरिक शास्त्र वाली सभ्य बनाए। प्राकृत भाषा वाली प्यारी लगे गृह विज्ञान वाली ललचाए। सोशियोलॉजी साथ निभाती नहीं विद्यार्थी रूप प्रकाशित हों जाए।। स्वरचित:- प्रकाश विद्यार्थी भोजपुर बिहार ©Prakash Vidyarthi #women_equality_day #kavita
Ahsaas_ki_kalam (Padma Tomr Prjpti)
White मैं रूठ जाऊ जो इक बार तुम गाना गाकर, मुझें मना लेना। मैं रूठ जाऊँ जो दोबार तुम खाना लाकर, मुझें खिला देना। फिर भी रूठ जाऊँ जो तुमसे, बैठ जाना पास मेरे क्षणभर, तुम कस कर गले लगा लेना। #ahsaas_e_shabad #ahsaas_ki_kalam ©Ahsaas_ki_kalam (Padma Tomr Prjpti) #Love #Life #Poet #poem #thought #Quote #treanding #Inspiration #kavita #ahsaas_e_shabad
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read morePrakash Vidyarthi
White मेरा ईश्क सूर्पनखा ::::::::::::::::::::::::::::::::::::: अरे तनिक सुनो सुन्दरी सूर्पनखा। हे देवी रुपवती मोहिनी नवलखा।। आपने ये कैसा परिणय प्रस्ताव रखा । हम ठहरे तूक्ष साधारण मानव नर और आप हैं दशानन दुलारी सखा।। फिर क्यों लालायित हों देवी बिना समझे प्रेम परिभाषा कैसे होगा हमारा संगम कन्या हे देखो हमारी दुर्दशा। न डालो प्रेम की मायाजाल हमपर न करो कोई आशा।। नहीं दे पाएंगे हम स्वर्ग सा सूख आपको न राजा सा । झेलना पड़ेगा आपको कष्ट सदा मिलेगा बस निराशा।। समझने के काबिल नहीं हम आपकी स्नेह बंधन सी भाषा।। होंगे मिलन न सुनो साधिके न भटको आगा पच्छा। पिता वचन पालन करने को आए हैं जंगल झखा।। हम बालक छोटे कुमार वनवासी आप हैं पूर्ण परिपक्का।। इस निर्जन झाड़ जंगल वन में उपवन कुटिया में । फिर आपने कब कैसे और कौन सा स्वाद है चखा।। जो हमें पाने की खातिर आप इतनी बेताब हैं। प्रेम पिपासी सुकुमारी जैसे एक खुली किताब हैं । हृदय में बेचैन सी उठती लहर आपकी बेहिसाब हैं। कोई और राजकुमार तलासो राक्षसी कूल कन्या आप तो ख़ुद ही बहुत सुंदर लाजवाब हैं। किसी और राज्य की राजकुमार की हसीन खुशी ख्याब हैं।। आप महाज्ञानी महाप्रतापि लंकेश की बहिनी। हम तुक्ष वनवासी की फिर कैसे बनेंगी संगिनी ।। राम लखन को त्याग दो करो न कोई मोह दामिनी।। हों जायेंगे मोहित आपपर कितने योद्धा हे वीर योगिनी।। पाओ न बलपूर्बक करो न कोई क्रोध हे क्रोधिनी।। आपकी चाहत में बहुत महावीर होंगे आतूर। हे लंका की राजकुमारी विद्वान गुणी बड़ी चातुर।। माया तपस्या छल बल से बहुत ही होंगे भरपूर।। महापंडित या यथा रघुवंशी क्षत्रिय धनुधारी प्रक्रमी। चुनो कोई राजदरबारी शौहर b बली नायक ठाकुर।। भले बन जाती आप हमारी भीं कोई मित्र सखा। आपकी परिणय निवेदन से दुख रहा हैं माथा।। आप भीं बूझो हमारी कष्ट दुर्दिन कथा व्यथा।। मैं आजीवन वचनबद्ध धनुधारि प्यारी पति सच्चा। क्षमा करें देवी अब मैं कितना गावूं अपनी प्रेम गाथा।। मैं हूं राम दशरथ नन्दन पूर्व सूत्र सिया हूं । प्राणों के प्यारे आंखों के तारे सीता के पिया हूं।। छोटे अनुज लखन के पास जाओ प्रिए।। मैं तो आपके कछु योग्य नहीं बार बार न अब हमे सताओ प्रिए।। मैं अग्रज राम का भक्त सेवक दास हूं देवी। जाओ राम भईया के पास हुस्न वहीं दिखाओ प्रिय। मेरे प्रेम के बीच मे जो प्राणी आए उसे मैं खा जाउंगी। दैत्य कुल की नारी वारी मैं कच्चे ही चाबा जाऊंगी।। देखो वीर वात्स्व उठो लक्ष्मण भाभी के प्राण संकट में हैं। रुको प्यारी झुको सुरपनाखा लक्ष्मण रेखा न पार करो हैं विनती विनय विवश में सीता मां पे अत्याचार न करो। वरना आपको अपना सुन्दरतम रूप गंवाना होगा। टेढ़ी चाल चलो न सुनो नाक सबसे छुपाना होगा।। प्यार में कपट छल होता नहीं पाना हैं तो पुकार करो। किसी दिलवर आशिक का सच्चे मन से दीदार करो ।। न किसी का तिरस्कार करो प्यार करो बस प्यार करो।। चाहें सोलह श्रृंगार करो इंतजार करो ऐतवार करो।। विद्यार्थी रूप मनुहार करो प्रकाश प्रेम आंखें चार करो।। स्वरचित:- प्रकाश विद्यार्थी भोजपुर बिहार ©Prakash Vidyarthi #Tulips #kavita #poem✍🧡🧡💛 #Poet #गीत